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शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

.आँसू


आँसू

तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .
तेरे दामन को भिगो दूं उसी में ज़ज़्ब हो जाऊ.

जन्म लूँ आँख में तेरी बहू मैं गाल पे तेरे.
तेरे होठो को छू लूँ मैं होंठ छूते ही मर जाऊ
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ . 

कभी मोती सा चमकूँ मै कभी पलकों  में खो जाऊ . 
सदा गम में ही नहीं खुशियों में भी ऑंखें भिगो जाऊ .
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ . 


अगर मैं आँख में निकलू नज़ारे धुँधले हो जाए .
मुझे ही देख पाओ तुम तुम्हें मैं ही नज़र आऊ.
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .

कभी ऐसा भी हो निकलू तो पलकें बंद तुम कर लो.
अंधेरा हो घना और मैं सुख की नींद सो जाऊ .
तमन्ना है तुम्हारी आँख का आँसू मैं बन जाऊ .

शनिवार, 31 दिसंबर 2011

बीत यह भी साल गया

बीत यह  भी साल गया 


जिंदगी की पुस्तक से पृष्ठ कुछ निकाल गया |
करके कंगाल हमे बीत यह भी साल गया ||


भूपेन्द्र हजारिका जगजीत हमे बहुत प्यारे थे |
देवानंद और शम्मी देश के दुलारे थे ||
उनको बड़ी क्रूरता से आज निगल काल गया |
करके कंगाल हमे बीत यह भी साल गया ||


भृष्टाचार ख़त्म हो यह मन में सव विचारे है |
एक अन्ना काफी था यह तो फिर हजारे है ||
करने को पारित बिल देके लोक पाल गया |
देके जिम्मेदारी हमे बीत यह भी साल गया ||


आतंकवाद फ़ैलाने को लादेन काफी था |
एक तानाशाह नाम जिसका गद्दाफी था ||
उनसे मुक्त करके बीत काल यह कराल गया |
करके खुशहॉल हमे बीत यह भी साल गया ||


जिंदगी की झोली में सौगातें डाल गया ||
करके खुशहाल हमे बीत यह भी साल गया ||
धोनी की टीम ने कमाल एक कर डाला |
किर्केट की दुनिया में इतिहास रच डाला ||
विश्व कप दिला के हमे करके मालामाल गया |

करके खुशहॉल हमे बीत यह भी साल गया ||

गलतियों से ले के सबक भूल को न दोहराए |
आने वाले साल में हम हर ख़ुशी को पा जाये ||
देके आशीष हमे बन यह भूत काल गया ||
२०११ का बीत आज साल गया ||






मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

एक बार बिष पान किया तो नील कंठ कहलाया .

एक बार बिष पान किया तो नील कंठ कहलाया .
रोज़ पिए इंसान जहर पर कोई समझ न पाया .

कितने ही अपमान के बिष घट पीना पड़ता है.
जीने की जब चाह नहीं तब जीना पड़ता है.
तिरस्कार का कितना ही विष हमने रोज़ पचाया.
एक बार बिष पान किया तो नील कंठ कहलाया .
रोज़ पिए इंसान जहर पर कोई समझ न पाया .

पेट की भूख मिटाने को अबलाये लुटती  है.
दूध पिलाने की खातिर माताए बिकती है.
आकर देख जरा धरती पर कितना जहर समाया .
एक बार बिष पान किया तो नील कंठ कहलाया .
रोज़ पिए इंसान जहर पर कोई समझ न पाया .

एक बार प्रभु इन्सान बन कर धरती पर आ जाओ .
थोडा सा विषपान करो कुछ तो अमृत वरसाओ .
दुःख से भरी तेरी धरती पर विष ही विष है समाया .
एक बार बिष पान किया तो नील कंठ कहलाया .
रोज़ पिए इंसान जहर पर कोई समझ न पाया .








 


मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

मुझको निर्भय कर देना व्यक्ति जब भी अपनी मृत्य से डरता है तो उसकी यही लालसा होती है की वोह मौत से डर न जाये . इन्ही भावों को व्यक्त्त करती है यह कविता

हे म्रत्यु देव आने से पहले मुझको  निर्भय कर देना . 
संताप मिटा देना मेरा अंतस को निर्मल कर देना. 

कर देना तुम विरक्त मुझको सारी सांसारिक वातों से. 
कर देना मोह भंग मेरा दुनिया के रिश्ते नातों से. 
फिर इस धरती से स्वर्ग लोक तक पथ निष्कंटक कर देना
संताप मिटा देना मेरा अंतस को निर्मल कर देना. 
हे म्रत्यु देव आने से पहले मुझको  निर्भय कर देना . 

मैं पीड़ा से घबराता हूँ कर देना संज्ञा हीन मुझे.
मैं अपनों  मे घिर जाता हूँ लेना अपनों से छीन मुझे.
तन शांत रहे मन  शांत रहे ऐसा प्रबंध कुछ कर देना.
संताप मिटा देना मेरा अंतस को निर्मल कर देना. 
हे म्रत्यु देव आने से पहले मुझको  निर्भय कर देना .